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Happyness

 खुश रहना हर व्यक्ति की चाहत है परन्तु अपनी खुशी को हम किसी व्यक्ति, वस्तु भोग पूर्ति व अन्य कारणों से चाहते है और वह वस्तु स्वयं की ख़ुश...

4 stage of god


4 stage of god


पहली अवस्था में सभी वस्तुओं का बाह्य निर्माण god द्वारा होता है | ( जैसे हमारे शरीर का विकास, निर्माण और अनुपयुक्त अंग या वस्तु का नष्ट होना और एक उदाहरण से इसे समझे ब्रह्माण्ड में पांच भूतों और चेतना का निर्माण हुआ |

दूसरी अवस्था में सभी वस्तुओं में आंतरिक परिवर्तन होता है; (god के द्वारा ) मनुष्य में एक आयु होने के पश्चात बाह्य विकास स्थिर होकर मानसिक और भवनात्मक विकास होता है और ब्रह्माण्ड में भी भुत और चेतना के अंदर परिवर्तन होकर पिंड से जीव का निर्माण होता है |

तीसरी अवस्था में पुनः बाह्य वस्तुओं में परिवर्तन होता है  ( god के द्वारा ) मनुष्य में एक निश्चित अवधि के मानसिक विकास के बाद उसका बाह्य शरीर शनैः-शनैः निर्बलता को प्राप्त होता है और ब्रह्माण्ड में भी इसी प्रकार जीवन स्वयं को अंत की और जाता हुआ देखा जा सकता है; अब कोई नई पृथ्वी या गृह नहीं बन रहा बल्कि जो गृह उपस्थित है उनमें की परिवर्तन होता हुआ यह ब्रमांड आगे बढ़ रहा है |

चौथी अवस्था में पुनः वस्तुओं के आंतरिक अवस्था में फेर होता है ( god के द्वारा )
मनुष्य जीवन की अंतिम अवस्था में जब बाह्य रूप से जीवन की आशा समाप्त होती दिख रही होती है तब मनुष्य का मन और बुधि की अवस्थायें भी छीण होने लगती है और ब्रह्माण्ड में भी पिंडों ( ग्रहों ) में जब जीवन की सम्भनायें नष्ट होती प्रतीत हो जाती है तभी उसमें उपस्थित आंतरिक चेतना ( जीवन ) भी अपने आरंभिक स्वरूप में वापस लौटने लगता है |

इस प्रकार अंत में प्रारम्भ हो जाता है ( god के द्वारा ) |

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