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Happyness

 खुश रहना हर व्यक्ति की चाहत है परन्तु अपनी खुशी को हम किसी व्यक्ति, वस्तु भोग पूर्ति व अन्य कारणों से चाहते है और वह वस्तु स्वयं की ख़ुश...

Happyness

 खुश रहना हर व्यक्ति की चाहत है परन्तु अपनी खुशी को हम किसी व्यक्ति, वस्तु भोग पूर्ति व अन्य कारणों से चाहते है और वह वस्तु स्वयं की ख़ुशी आप से चाहती है तो फिर दोनो के बीच में एक भ्रम उत्पन्न हो जाता है और दुःख का जन्म होता है |

शरीर को पांच पाँच इन्द्रियाँ प्राप्त है उनके अलग-अलग विषय है जिनकी पूर्ति शरीर को सुख का अनुभव देता है |


मन शरीर के माद्यम से अपने अतीन्दिर्य विसयों की पूर्ति चाहता है और सुख का अनुभव करता है परन्तु मन शरीर की इन्द्रियों के विसयों का अति भोग प्राप्त करने के कारण शरीर का छय होते रहता जो मन को दुखी बनाये रखता है |

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  • धन  कम हो तो, ख़र्च काम कर दो |
  • पुण्य कम हो तो, जाने दो की प्रकृति बना दो |
  • प्रेम कम  हो तो, प्रेम बाँट के देखो |
सुख शरीर का गुण,
दुःख मन का गुण,
आनन्द आत्मा का गुण |
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