अधूरा सच

अधूरा सच

कुछ रहीं अधूरी सच जैसी ये जिंदगी, खामोश खड़े पहाड़ों सी ।

सांसों की हर सरगम हैं ,अधूरा सच।

कुछ रही अधूरी सच जैसी ये जिंदगी, बलखाती नदियों सी।मन का मेला हैं, अधूरा सच।कुछ रही अधूरी सच जैसी ये जिंदगी, गहरे समदर सी।तन की सुंदरता अधूरा सच।कुछ रही अधूरी सच जैसी ये जिंदगी, सूरज के तेज सी।शब्दों में इज़हार अधूरा सच।डालता बचपन, चड़ती जवानी, मरता बुढ़ापा सब रहा अधूरा, अब मौत आयी हैं तो वो भी अधूरी।

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