लफ्ज़

लफ्ज़


लफ्ज़ का टोटा क्यू हो जाता है, जब भी तेरी तारीफे करते हैं।
मुक़म्मल सा कोई अल्फ़ाज़ तुझे बयॉ  नहीं कर पाता,
दिल के शब्दों में दर्द कह देता हूं।




चुप रहूं तो आंसू कह देता हूं।
जब भी तारीफ तेरी करनी होती है मुस्कान कह देता हूं।
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