भव सागर


भव सागर 


क्या मैंने इस भव सागर में इस लिए प्रवेश किया है कि में भव के भावों में बहता जाऊ।
मुझे एक गहरे गोते खाने की जरूरत है, और ढूंढ  लाऊ वो अनमोल मोटी उस तलहटी से।
जो  छोटी सी संभावना को एक नया आयाम देगा, सपनों की उड़ान से ऊपर एक आशमा देगा।



कभी सुख की लहरों में, कभी दुःख की सुनामी में व्यर्थ होता जीवन।
कल और कल में अटकी हुई धुरी हमारी अब वक़्त है अपनी उस अनन्त संभावनाओं के अनमोल मोती को ले आने की जो हर संभावनाओं से पार कर जाने की संभावना को खोल दे।
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