कोरा कागज और में

कोरा कागज और में


कोरा कागज और में दोस्त हैं, बचपन के।
जब पहली बार देखा कोर कागज, तो देखा में भी उस के जैसा कोरा हू।
अब कोर कागज मुझे बुलाता हैं, और में उस पर मन्न के कोरे विचारो की माला लिख आता हूं।
कोर कागज और में दोस्त हैं बचपन के।



मां का प्यार, जैसे कोरा कागज।
पिता की फटकार, जैसे कोरा कागज।
भाई- बहनों की वो अनबन, जैसे कोरा कागज़।
दोस्तो का वो व्यवहार, जैसे कोरा कागज़।
कोरा कागज और में दोस्त है बचपन के।
एक तरफ अनदेखा संसार, जैसे कोरा कागज़।
हर काम में वो खो जाना, जैसे कोरा कागज।
हर नाराजगी में वो अपनापन, जैसे कोरा कागज़।
कोरा कागज़ और में दोस्त हैं बचपन के। 😊

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